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Rural Development Department - Government of Bihar
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FAQ

Official answers to common RDD complaint and ticket questions.

Find guidance on scheme complaint registration, timelines, escalation, ticket tracking, and information handling.

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आधिकारिक जानकारी तेज़ी से खोजें।

पंजीकरण, समय-सीमाएँ, एस्केलेशन और नागरिक प्रतिक्रिया से जुड़े उत्तर पाने के लिए श्रेणी के अनुसार देखें या सीधे खोजें।

The RDD Bihar Grievance Portal is a structured public support system for registering, tracking, and resolving grievances related to key Rural Development Department schemes.

Any citizen can submit a grievance related to services, benefits, or implementation support under the listed RDD schemes.

Grievances can be raised for scheme-specific issues under LSBA, JJHA, PMAY-G, MGNREGA, and other RDD support areas enabled on the portal.

You can register a grievance through the toll-free helpline, the mobile application, or the online grievance portal.

Yes. Every registered grievance is assigned a unique grievance ID that can be used for tracking.

Each grievance category has a predefined turnaround time (TAT) ranging from 3 days to 30 days, depending on the nature of the grievance.

If a grievance is not resolved within the prescribed TAT, it is automatically escalated to higher authorities as per the escalation matrix.

Citizen feedback collected after resolution helps improve service quality, monitor performance, and strengthen sanitation systems.

Yes. All grievance data is handled securely and stored in compliance with Government of Bihar data security and privacy guidelines.

व्यक्तिगत शौचालय (IHHL) के निर्माण हेतु लाभुकों को स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।

प्रत्येक लाभार्थी को Rs. 12,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

संबंधित लाभुक संबंधित पोर्टल या हेल्पलाइन, अपने ग्राम पंचायत, प्रखंड कार्यालय या संबंधित स्वच्छता पदाधिकारी से संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

लाभुक द्वारा शौचालय का निर्माण पूर्ण होने तथा सत्यापन एवं IMIS पोर्टल पर जियो टैगिंग के बाद ही प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाता है।

निम्नलिखित माध्यमों से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है:

  • संबंधित पोर्टल या हेल्पलाइन
  • ग्राम पंचायत या मुखिया
  • प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO)

लाभुक अपने आवेदन संख्या या आधार संख्या के माध्यम से संबंधित पोर्टल अथवा स्थानीय कार्यालय से भुगतान स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

शिकायत दर्ज करने के समय निम्नलिखित जानकारी तैयार रखें:

  • लाभुक का नाम एवं पता
  • आवेदन संख्या या पंजीकरण संख्या
  • आधार संख्या
  • शौचालय का फोटो, यदि उपलब्ध हो

यह एक सार्वजनिक शौचालय सुविधा है, जिसका उपयोग सामुदायिक स्तर पर किया जाता है।

संबंधित पोर्टल या हेल्पलाइन, संबंधित पंचायत, वार्ड सदस्य या प्रखंड कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

निम्नलिखित समस्याओं की शिकायत की जा सकती है:

  • पानी की आपूर्ति नहीं होना
  • साफ-सफाई का अभाव
  • टूट-फूट या रख-रखाव की समस्या
  • बिजली या प्रकाश की व्यवस्था नहीं होना
  • शौचालय के आसपास जलभराव

इसका रख-रखाव संबंधित ग्राम पंचायत एवं संचालन समिति द्वारा किया जाता है।

निम्नलिखित माध्यमों से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है:

  • संबंधित पोर्टल या हेल्पलाइन
  • पंचायत कार्यालय के माध्यम से लिखित आवेदन

शिकायत प्राप्त होने के उपरांत संबंधित विभाग द्वारा यथाशीघ्र आवश्यक कार्रवाई की जाती है।

इस सेवा के अंतर्गत स्वच्छता कर्मी द्वारा प्रतिदिन घरों से कचरे का संग्रहण किया जाता है।

संबंधित पोर्टल या हेल्पलाइन, संबंधित वार्ड सदस्य या पंचायत में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित समयानुसार स्वच्छता कर्मी द्वारा दैनिक रूप से कचरा संग्रहण किया जाता है।

निम्नलिखित समस्याओं की शिकायत की जा सकती है:

  • कचरा संग्रहण का नियमित न होना
  • स्वच्छता कर्मी का नहीं आना
  • कचरा वाहन की अनुपलब्धता
  • गंदगी का उचित निस्तारण नहीं होना

कचरे के पृथक्करण से उसके वैज्ञानिक निस्तारण एवं पुनर्चक्रण में सुविधा होती है।

शिकायत दर्ज करने के समय निम्नलिखित जानकारी तैयार रखें:

  • वार्ड संख्या
  • पता
  • समस्या का विवरण
  • तिथि एवं समय

घरेलू एवं अन्य स्रोतों से निकलने वाले गंदे पानी, जैसे नाली और सोख्ता, के समुचित निस्तारण एवं प्रबंधन को धूसर जल प्रबंधन कहा जाता है।

संबंधित पोर्टल या हेल्पलाइन अथवा संबंधित पंचायत में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

निम्नलिखित समस्याओं की शिकायत की जा सकती है:

  • नालियों की सफाई नहीं होना
  • जल जमाव की समस्या
  • नालियों का अवरुद्ध होना
  • दुर्गंध एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्या

ग्राम पंचायत द्वारा नियमित रूप से नालियों की सफाई कराई जाती है।

निम्नलिखित माध्यमों से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है:

  • संबंधित पोर्टल या टोल-फ्री हेल्पलाइन
  • पंचायत कार्यालय के माध्यम से लिखित आवेदन

धूसर जल प्रबंधन से निम्नलिखित लाभ होते हैं:

  • जल जमाव में कमी
  • स्वच्छता में सुधार
  • रोगों की रोकथाम
  • पर्यावरण संरक्षण

प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण अंतर्गत आवास का लाभ उन परिवारों को दिया जाता है जिनकी आवास आवश्यकता सामाजिक, आर्थिक एवं जाति आधारित जनगणना 2011 तथा आवास प्लस के माध्यम से चिह्नित की गई है। इनमें बेघर अथवा शून्य, एक अथवा दो कमरे वाले कच्चे मकान में रहने वाले परिवार सम्मिलित हैं।

निम्नलिखित में से किसी भी मापदंड को पूरा करने वाले परिवार अपात्र हैं:

  • जिनके पास पक्का मकान है
  • मोटर युक्त तिपहिया या चौपहिया वाहन वाले परिवार
  • मशीनी तिपहिया या चौपहिया कृषि उपकरण वाले परिवार
  • Rs. 50,000 या अधिक ऋण सीमा वाला किसान क्रेडिट कार्ड रखने वाले परिवार
  • जिनका कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी है
  • सरकार के पास पंजीकृत गैर-कृषि उद्यम वाले परिवार
  • जिनका कोई सदस्य प्रतिमाह Rs. 15,000 से अधिक कमाता है
  • आयकर देने वाले परिवार
  • व्यवसाय कर देने वाले परिवार
  • 2.5 एकड़ या अधिक सिंचित भूमि वाले परिवार
  • 5 एकड़ या अधिक असिंचित भूमि वाले परिवार

ग्राम सभा के अनुमोदन के उपरांत पात्र परिवारों की सूची का प्रकाशन प्रखंड द्वारा प्रखंड भवन, पंचायत भवन, सार्वजनिक भवन, सरकारी विद्यालय एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर दीवार लेखन के माध्यम से किया जाता है। इसके अलावा अपने पंचायत के आवास सहायक अथवा अपने प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

समय-समय पर ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित समय सीमा में आवास ऐप के माध्यम से आवास की आवश्यकता वाले परिवारों के नाम जोड़े जाते हैं। ग्राम सभा के अनुमोदन के बाद प्रतीक्षा सूची निर्धारित की जाती है। नाम जोड़ने के लिए अपने पंचायत के आवास सहायक अथवा अपने प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार से लक्ष्य प्राप्त होने के पश्चात आवास का लाभ देने हेतु कार्रवाई की जाती है। आवास लाभ के लिए अपने पंचायत के आवास सहायक अथवा अपने प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

प्राथमिकता सूची में नाम रहने एवं लक्ष्य में नाम आने के पश्चात लाभार्थी को आवास का लाभ दिया जाता है। लाभार्थी के पास आवास निर्माण हेतु कम से कम 25 वर्ग मीटर अपनी जमीन होनी चाहिए। सहायता राशि किस्तों में प्राप्त करने के बाद लाभार्थी को स्वयं आवास का निर्माण कराना होता है।

योजना अंतर्गत Rs. 1,20,000 की सहायता राशि तीन किस्तों में अंतरित की जाती है:

  • प्रथम किस्त: स्वीकृति के साथ Rs. 40,000
  • द्वितीय किस्त: प्लिंथ स्तर पूर्ण होने के बाद Rs. 40,000
  • तृतीय किस्त: छत ढलाई के बाद Rs. 40,000

लाभार्थी को निम्नलिखित दस्तावेज एवं जानकारी आवश्यक हैं:

  • आधार से जुड़ा तथा ई-केवाईसी पूर्ण बैंक खाता
  • आधार
  • जॉब कार्ड
  • भूमि स्वामित्व से संबंधित विवरण
  • मोबाइल नंबर

हाँ। आवास निर्माण के क्रम में शौचालय का निर्माण अनिवार्य है।

हाँ। आवास निर्माण के क्रम में शौचालय निर्माण के उपरांत लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान से Rs. 12,000 की सहायता राशि अंतरित की जाती है।

शौचालय निर्माण के उपरांत लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान से Rs. 12,000 की सहायता राशि प्राप्त करने हेतु पंचायत के स्वच्छता पर्यवेक्षक, प्रखंड समन्वयक अथवा प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

मनरेगा/VB-G-RAM-G के अंतर्गत लाभार्थी परिवार के लिए 90 दिनों के समतुल्य अकुशल मजदूरी का प्रावधान है।

अकुशल मजदूरी प्राप्त करने हेतु अपने पंचायत के पंचायत रोजगार सेवक अथवा प्रखंड के कार्यक्रम पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

प्रथम अथवा द्वितीय किस्त प्राप्त होने के बाद पंजीकृत लाभार्थी की मृत्यु हो जाने पर आगे की किस्तों के भुगतान हेतु बैंक खाता एवं आधार विवरण में परिवर्तन का प्रावधान किया गया है। इस स्थिति में अपने आवास सहायक से संपर्क किया जा सकता है।

निर्धारित स्तर तक आवास निर्माण के बाद अगली किस्त जारी नहीं होने पर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी अथवा जिला में उप विकास आयुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण विकास विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

भुगतान में निम्नलिखित कारणों से विलंब हो सकता है:

  • लाभुक द्वारा गलत बैंक खाता या आधार संख्या देना अथवा संबंधित दस्तावेज देने में देरी करना
  • पंजीकरण के बाद लाभुक की मृत्यु होना
  • आवास निर्माण हेतु जमीन विवादित होना

भुगतान में निम्नलिखित कारणों से विलंब हो सकता है:

  • आवास निर्माण प्रारंभ नहीं किया जाना
  • आवास का निर्माण प्लिंथ स्तर तक नहीं होना
  • लाभुक की मृत्यु होना
  • आवास निर्माण हेतु जमीन विवादित होना

भुगतान निम्नलिखित कारणों से नहीं हो सकता है:

  • आवास निर्माण निर्धारित छत स्तर तक नहीं होना
  • लाभुक की मृत्यु होना

यदि लाभार्थी के पास आवास निर्माण हेतु भूमि नहीं है तो राज्य सरकार द्वारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से भूमि उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत मुख्यमंत्री वास स्थल क्रय सहायता योजना के अंतर्गत लाभुक को स्थानीय MVR के आधार पर भूमि क्रय हेतु न्यूनतम Rs. 60,000 से अधिकतम Rs. 1,00,000 तक सहायता राशि दी जाती है। इसका लाभ प्राप्त करने हेतु अपने पंचायत के आवास सहायक अथवा अपने प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

यह ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण हेतु राज्य प्रायोजित योजना है। इसके अंतर्गत 1 जनवरी 1996 के पूर्व विभिन्न आवास योजनाओं के तहत क्लस्टर में निर्मित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अति पिछड़ा वर्ग के ऐसे परिवारों को आवास निर्माण हेतु सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती है, जिनका आवास वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है तथा पूर्व में आवास योजना का लाभ प्राप्त रहने के कारण PMAY-G की पात्रता नहीं रखते हैं।

योजना अंतर्गत Rs. 1,20,000 की सहायता राशि तीन किस्तों में अंतरित की जाती है:

  • प्रथम किस्त: स्वीकृति के साथ Rs. 40,000
  • द्वितीय किस्त: प्लिंथ स्तर पूर्ण होने के बाद Rs. 40,000
  • तृतीय किस्त: छत ढलाई के बाद Rs. 40,000

मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना अंतर्गत आवास का लाभ प्राप्त करने की अर्हता PMAY-G अंतर्गत निर्धारित अर्हता के समान है। इसका लाभ प्राप्त करने हेतु अपने पंचायत के आवास सहायक अथवा अपने प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

यह राज्य प्रायोजित योजना है। 1 अप्रैल 2010 के पूर्व इंदिरा आवास योजना अंतर्गत आवास का लाभ प्राप्त अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अति पिछड़ा वर्ग के ऐसे परिवारों, जिनका आवास अधूरे या अपूर्ण अवस्था में है, उन्हें पूर्ण कराने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास सहायता योजना प्रारंभ की गई है।

योजना अंतर्गत Rs. 50,000 की सहायता राशि दो किस्तों में अंतरित की जाती है। इसका लाभ प्राप्त करने हेतु अपने पंचायत के आवास सहायक अथवा अपने प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

इसकी जानकारी निम्न माध्यमों से प्राप्त की जा सकती है:

  • राजस्व अभिलेख
  • अंचल कार्यालय
  • ग्राम पंचायत
  • भूमि सर्वे नक्शा

शिकायत निम्न कार्यालयों में की जा सकती है:

  • मुखिया अथवा ग्राम पंचायत
  • अंचल अधिकारी (CO)
  • प्रखंड कार्यालय
  • जिला प्रशासन

नहीं। इस मिशन के अंतर्गत केवल सरकारी अथवा सार्वजनिक जल संचयन संरचनाएँ ही सम्मिलित हैं।

हाँ। संबंधित भूमि एवं राजस्व कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

हाँ। अतिक्रमण मुक्त होने के बाद अवयव 02 के अंतर्गत जल संचयन संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाता है।

रखरखाव में निम्न सहयोग करते हैं:

  • ग्राम पंचायत
  • स्थानीय प्रशासन
  • संबंधित विभाग
  • स्थानीय समुदाय

शिकायत निम्न प्रकार से दी जा सकती है:

  • लिखित आवेदन द्वारा
  • पंचायत अथवा प्रशासनिक कार्यालय के माध्यम से

निम्न जानकारी उपयोगी हो सकती है:

  • खाता अथवा खेसरा संख्या
  • स्थल का विवरण
  • फोटो
  • उपलब्ध भूमि अभिलेख की प्रति

इसके अंतर्गत तालाब, पोखर, आहर और पइन जैसी सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाता है, ताकि वर्षा जल का संरक्षण हो सके और जल संकट एवं जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को कम किया जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में 5 एकड़ से छोटे सार्वजनिक उपयोग के तालाबों का जीर्णोद्धार ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कराया जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में 5 एकड़ से बड़े सार्वजनिक उपयोग के तालाबों का जीर्णोद्धार लघु जल संसाधन विभाग द्वारा कराया जाता है।

1 एकड़ से छोटे सार्वजनिक उपयोग के आहर-पइन का जीर्णोद्धार ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कराया जाता है।

1 एकड़ से बड़े सार्वजनिक उपयोग के आहर-पइन का जीर्णोद्धार लघु जल संसाधन विभाग द्वारा कराया जाता है।

शहरी क्षेत्रों में सभी चिह्नित सार्वजनिक उपयोग के तालाबों का जीर्णोद्धार नगर विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से कराया जाता है।

इसके अंतर्गत सार्वजनिक कुओं को चिह्नित कर उनका जीर्णोद्धार किया जाता है, ताकि वर्षा जल का संरक्षण हो सके और जल संकट एवं जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को कम किया जा सके।

चिह्नित सार्वजनिक कुओं का जीर्णोद्धार नगर विकास एवं आवास विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और पंचायती राज विभाग द्वारा कराया जाता है।

हाँ। जाली अथवा ढक्कन लगाना आवश्यक है, ताकि कोई बच्चा, बुजुर्ग या जानवर गलती से न गिर जाए और पत्ते, कचरा, धूल अथवा मिट्टी पानी को गंदा न करें।

प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी से संपर्क करें।

हाँ।

जीर्णोद्धार होने के पश्चात सार्वजनिक कुएँ की देखभाल स्थानीय लोगों द्वारा की जाएगी।

प्रखंड स्तर पर अंचल अधिकारी और जिला स्तर पर अपर समाहर्ता से संपर्क करें।

इसके अंतर्गत सार्वजनिक कुओं अथवा चापाकलों के किनारे सोख्ता, रिचार्ज अथवा अन्य जल संचयन संरचना का निर्माण किया जाता है, ताकि आसपास जल जमाव न हो और भूजल स्तर बढ़ सके।

सोख्ता सार्वजनिक चापाकलों एवं सार्वजनिक कुओं के किनारे बनाया जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और पंचायती राज विभाग द्वारा सोख्ता बनाया जाता है। शहरी क्षेत्रों में नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा इसका निर्माण किया जाता है।

अपने पंचायत के पंचायती रोजगार सेवक अथवा प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) से संपर्क करें, या ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कराकर मांग करें।

  • जल जमाव समाप्त होता है
  • भूजल रिचार्ज होता है
  • पीने का पानी साफ रखने में सहायता मिलती है
  • पर्यावरण की रक्षा होती है

चेकडैम एक छोटी जल अवरोधक संरचना है, जिसे नालों, छोटी नदियों अथवा जलधाराओं पर बनाया जाता है, ताकि वर्षा जल को रोककर उसका संचयन एवं भूजल पुनर्भरण किया जा सके।

  • वर्षा जल का संरक्षण
  • भूजल स्तर बढ़ाना
  • मिट्टी कटाव रोकना
  • सिंचाई हेतु जल उपलब्ध कराना
  • सूखे की समस्या कम करना

  • छोटे नालों एवं जलधाराओं पर
  • पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में
  • जल बहाव वाले ग्रामीण क्षेत्रों में
  • ऐसे स्थानों पर जहाँ वर्षा जल तेजी से बह जाता हो

  • पत्थर
  • ईंट
  • सीमेंट
  • कंक्रीट
  • मिट्टी एवं गिट्टी

  • भूजल पुनर्भरण बढ़ता है
  • आसपास के कुओं एवं चापाकलों में जल स्तर सुधरता है
  • किसानों को सिंचाई में सुविधा मिलती है
  • हरियाली एवं कृषि उत्पादन बढ़ता है
  • जल संकट कम होता है

यह स्थानीय भूवैज्ञानिक स्थिति एवं जल प्रवाह पर निर्भर करता है। सामान्यतः छोटे एवं मध्यम आकार के चेकडैम बनाए जाते हैं।

हाँ। चेकडैम में रुका हुआ पानी धीरे-धीरे जमीन में समाहित होकर भूजल रिचार्ज करता है।

  • समय-समय पर गाद हटाना
  • टूट-फूट की मरम्मत करना
  • जल निकासी मार्ग साफ रखना
  • आसपास वृक्षारोपण करना

हाँ। इससे सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध रहता है, जिससे खेती एवं फसल उत्पादन में सुधार होता है।

हाँ। बिहार सरकार द्वारा संचालित जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं भूजल संवर्धन हेतु चेकडैम निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।

  • चेकडैम छोटे आकार की संरचना होती है
  • बाँध बड़े जलाशय निर्माण हेतु बनाए जाते हैं
  • चेकडैम का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण एवं रिचार्ज है

हाँ। इससे हरियाली बढ़ती है, मिट्टी संरक्षण होता है तथा जल स्रोतों का संरक्षण होता है।

  • सिंचाई सुविधा में वृद्धि
  • पेयजल उपलब्धता बेहतर होना
  • कृषि उत्पादन में सुधार
  • जल संकट में कमी
  • रोजगार एवं ग्रामीण विकास को बढ़ावा

हाँ। लाभुक द्वारा नए तालाब का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है।

हाँ। निजी तालाब में जल-जीवन-हरियाली का लोगो युक्त सूचना पट्ट लगा हुआ है।

हाँ। वर्तमान समय में लाभुक द्वारा तालाब में मत्स्यपालन का कार्य सुगमता से किया जा रहा है।

हाँ। जिस भूमि पर स्थल निरीक्षण किया गया था, उसी पर तालाब का निर्माण किया गया है।

  • मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लाभुकों के लिए 70%, अन्य वर्ग के लिए 50% तथा उद्यमी के लिए 40%
  • तालाब मात्स्यिकी विशेष सहायता योजना: केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लाभुकों के लिए 70%
  • पठारी क्षेत्र तालाब निर्माण आधारित मत्स्यपालन योजना: केवल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लाभुकों के लिए 80%

हाँ। लाभुक द्वारा निजी भूमि पर पोखर-सह-मखाना का निर्माण कार्य किया गया है और यह सुचारू रूप से चल रहा है।

हाँ। वर्तमान समय में लाभुक द्वारा मनरेगा के तहत खुदवाए गए तालाब में मत्स्यपालन किया जा रहा है और तालाब पूर्ण रूप से क्रियाशील है।

हाँ। लाभुक द्वारा मत्स्य-सह-मखाना पालन किया जा रहा है, जिससे जीविका चलाने में सहयोग मिलता है और लाभुक इस काम में सक्रिय है।

हाँ। लाभुक अपनी भूमि पर नए जल स्रोतों के सृजन के अंतर्गत जल संचय कर रहे हैं, जिससे सिंचाई हेतु पानी आसानी से उपलब्ध होता है।

हाँ। लाभुक फार्म पॉन्ड के माध्यम से जल का उपयोग कृषि कार्य हेतु कर रहे हैं।

हाँ। इस पद्धति से किसान कृषि प्रक्षेत्र में सिंचाई हेतु जल संग्रह कर आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग कर रहे हैं।

भवन की छत पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइपों की सहायता से टंकी में एकत्र कर भूजल रिचार्ज किया जाता है।

इसका मुख्य उद्देश्य वर्षा के पानी को व्यर्थ बहने से रोकना और भूजल स्तर को बढ़ाना है।

  • छत
  • पाइप लाइन
  • फिल्टर इकाई
  • रिचार्ज पिट

निर्माण लागत घर के आकार पर निर्भर करती है। छोटे घरों में लगभग Rs. 20,000 से Rs. 40,000 और बड़े घरों में Rs. 40,000 से Rs. 70,000 तक खर्च आता है।

निर्माण के बाद छत, नालियों, पाइपों और फिल्टर की नियमित सफाई की जानी चाहिए। रिसाव और भूजल रिचार्ज संरचना की भी समय-समय पर जाँच करनी चाहिए।

शहरी क्षेत्र में छत-वर्षा जल संचयन संरचना का निर्माण कराने पर संपत्ति कर में 5% की छूट मिलती है।

पौधारोपण कार्य मुख्यतः निम्न माध्यमों से कराया जाता है:

  • वन विभाग, बिहार
  • मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीण विकास विभाग, बिहार

  • सड़क किनारे
  • नहर एवं आहर-पइन के किनारे
  • सरकारी भूमि
  • विद्यालय परिसर
  • पंचायत भूमि
  • नदी एवं तालाब किनारे

पौधे मुख्यतः निम्न स्रोतों से उपलब्ध कराए जाते हैं:

  • वन विभाग की नर्सरी
  • सरकारी पौधशालाएँ
  • दीदी की पौधशाला

स्थानीय जलवायु एवं पर्यावरण के अनुसार निम्न लगाए जाते हैं:

  • फलदार पौधे
  • छायादार वृक्ष
  • औषधीय पौधे
  • पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी प्रजातियाँ

हाँ। आवश्यकता अनुसार पुनः पौधारोपण अथवा गैप फिलिंग किया जाता है।

कुछ योजनाओं के अंतर्गत पात्रता एवं लागू नियमों के अनुसार निजी भूमि पर भी पौधारोपण किया जा सकता है।

सरकारी पौधों को नुकसान पहुँचाने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

देखभाल में निम्न सहयोग करते हैं:

  • संबंधित विभाग
  • ग्राम पंचायत
  • स्थानीय समुदाय
  • स्वयं सहायता समूह

जैविक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ती है, स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षित रहते हैं, उत्पादन लागत में कमी आती है तथा उत्पादों का अधिक दाम मिल सकता है।

अनुदान संबंधी जानकारी के लिए प्रखंड कृषि पदाधिकारी अथवा जिला कृषि पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। अनुमानतः Rs. 50,000 प्रति हेक्टेयर का अनुदान उपलब्ध है।

जैविक कृषि का सत्यापन BSSOCA, बिहार राज्य बीज और जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी, मीठापुर, पटना द्वारा किया जाता है।

सूक्ष्म सिंचाई के दो प्रकार होते हैं:

  • टपक सिंचाई
  • फव्वारा सिंचाई

सूक्ष्म सिंचाई के लिए किसान की स्वयं की जमीन होनी चाहिए अथवा कम से कम 7 वर्षों के लिए पट्टे पर जमीन का करारनामा होना आवश्यक है।

सूक्ष्म सिंचाई में 80% से 90% तक अनुदान उपलब्ध है।

टपक सिंचाई के लिए 0.5 एकड़ तथा फव्वारा सिंचाई के लिए 1 एकड़ भूमि पर किसान की स्वयं की जमीन अथवा कम से कम 7 वर्षों के लिए पट्टे पर जमीन का करारनामा होना चाहिए।

मौसम अनुकूल कृषि के अंतर्गत सूखा एवं बाढ़ सहनशील बीज, फसल विविधीकरण, फसल चक्र, कम जुताई, खेत में फसल अवशेष छोड़ना, मल्चिंग आदि तकनीक आती हैं।

मौसम अनुकूल कृषि तकनीक अपनाने के लिए अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।

हाँ। मौसम अनुकूल कृषि के लिए सहायता कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से सामग्री के रूप में दी जाती है।

इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और ऊर्जा बचत के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

सरकारी भवनों पर सोलर पैनल का इंस्टॉलेशन Bihar Renewable Energy Development Agency (BREDA) द्वारा किया जाता है।

Bihar Renewable Energy Development Agency (BREDA) बिहार सरकार की एक एजेंसी है, जो राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा, जैसे सौर ऊर्जा, को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है।

नहीं। अवयव 10 के अंतर्गत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए मुख्य रूप से सरकारी भवनों पर Bihar Renewable Energy Development Agency के माध्यम से सोलर पैनल स्थापित किए जाते हैं। निजी घरों पर सोलर पैनल लगाने का प्रावधान इस अवयव के अंतर्गत नहीं है।

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