Official answers to common RDD complaint and ticket questions.
Find guidance on scheme complaint registration, timelines, escalation, ticket tracking, and information handling.
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इसकी जानकारी निम्न माध्यमों से प्राप्त की जा सकती है:
- राजस्व अभिलेख
- अंचल कार्यालय
- ग्राम पंचायत
- भूमि सर्वे नक्शा
शिकायत निम्न कार्यालयों में की जा सकती है:
- मुखिया अथवा ग्राम पंचायत
- अंचल अधिकारी (CO)
- प्रखंड कार्यालय
- जिला प्रशासन
नहीं। इस मिशन के अंतर्गत केवल सरकारी अथवा सार्वजनिक जल संचयन संरचनाएँ ही सम्मिलित हैं।
हाँ। संबंधित भूमि एवं राजस्व कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
हाँ। अतिक्रमण मुक्त होने के बाद अवयव 02 के अंतर्गत जल संचयन संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाता है।
रखरखाव में निम्न सहयोग करते हैं:
- ग्राम पंचायत
- स्थानीय प्रशासन
- संबंधित विभाग
- स्थानीय समुदाय
शिकायत निम्न प्रकार से दी जा सकती है:
- लिखित आवेदन द्वारा
- पंचायत अथवा प्रशासनिक कार्यालय के माध्यम से
निम्न जानकारी उपयोगी हो सकती है:
- खाता अथवा खेसरा संख्या
- स्थल का विवरण
- फोटो
- उपलब्ध भूमि अभिलेख की प्रति
इसके अंतर्गत तालाब, पोखर, आहर और पइन जैसी सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाता है, ताकि वर्षा जल का संरक्षण हो सके और जल संकट एवं जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को कम किया जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों में 5 एकड़ से छोटे सार्वजनिक उपयोग के तालाबों का जीर्णोद्धार ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कराया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में 5 एकड़ से बड़े सार्वजनिक उपयोग के तालाबों का जीर्णोद्धार लघु जल संसाधन विभाग द्वारा कराया जाता है।
1 एकड़ से छोटे सार्वजनिक उपयोग के आहर-पइन का जीर्णोद्धार ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कराया जाता है।
1 एकड़ से बड़े सार्वजनिक उपयोग के आहर-पइन का जीर्णोद्धार लघु जल संसाधन विभाग द्वारा कराया जाता है।
शहरी क्षेत्रों में सभी चिह्नित सार्वजनिक उपयोग के तालाबों का जीर्णोद्धार नगर विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से कराया जाता है।
इसके अंतर्गत सार्वजनिक कुओं को चिह्नित कर उनका जीर्णोद्धार किया जाता है, ताकि वर्षा जल का संरक्षण हो सके और जल संकट एवं जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को कम किया जा सके।
चिह्नित सार्वजनिक कुओं का जीर्णोद्धार नगर विकास एवं आवास विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और पंचायती राज विभाग द्वारा कराया जाता है।
हाँ। जाली अथवा ढक्कन लगाना आवश्यक है, ताकि कोई बच्चा, बुजुर्ग या जानवर गलती से न गिर जाए और पत्ते, कचरा, धूल अथवा मिट्टी पानी को गंदा न करें।
प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी से संपर्क करें।
हाँ।
जीर्णोद्धार होने के पश्चात सार्वजनिक कुएँ की देखभाल स्थानीय लोगों द्वारा की जाएगी।
प्रखंड स्तर पर अंचल अधिकारी और जिला स्तर पर अपर समाहर्ता से संपर्क करें।
इसके अंतर्गत सार्वजनिक कुओं अथवा चापाकलों के किनारे सोख्ता, रिचार्ज अथवा अन्य जल संचयन संरचना का निर्माण किया जाता है, ताकि आसपास जल जमाव न हो और भूजल स्तर बढ़ सके।
सोख्ता सार्वजनिक चापाकलों एवं सार्वजनिक कुओं के किनारे बनाया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और पंचायती राज विभाग द्वारा सोख्ता बनाया जाता है। शहरी क्षेत्रों में नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा इसका निर्माण किया जाता है।
अपने पंचायत के पंचायती रोजगार सेवक अथवा प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) से संपर्क करें, या ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कराकर मांग करें।
- जल जमाव समाप्त होता है
- भूजल रिचार्ज होता है
- पीने का पानी साफ रखने में सहायता मिलती है
- पर्यावरण की रक्षा होती है
चेकडैम एक छोटी जल अवरोधक संरचना है, जिसे नालों, छोटी नदियों अथवा जलधाराओं पर बनाया जाता है, ताकि वर्षा जल को रोककर उसका संचयन एवं भूजल पुनर्भरण किया जा सके।
- वर्षा जल का संरक्षण
- भूजल स्तर बढ़ाना
- मिट्टी कटाव रोकना
- सिंचाई हेतु जल उपलब्ध कराना
- सूखे की समस्या कम करना
- छोटे नालों एवं जलधाराओं पर
- पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में
- जल बहाव वाले ग्रामीण क्षेत्रों में
- ऐसे स्थानों पर जहाँ वर्षा जल तेजी से बह जाता हो
- पत्थर
- ईंट
- सीमेंट
- कंक्रीट
- मिट्टी एवं गिट्टी
- भूजल पुनर्भरण बढ़ता है
- आसपास के कुओं एवं चापाकलों में जल स्तर सुधरता है
- किसानों को सिंचाई में सुविधा मिलती है
- हरियाली एवं कृषि उत्पादन बढ़ता है
- जल संकट कम होता है
यह स्थानीय भूवैज्ञानिक स्थिति एवं जल प्रवाह पर निर्भर करता है। सामान्यतः छोटे एवं मध्यम आकार के चेकडैम बनाए जाते हैं।
हाँ। चेकडैम में रुका हुआ पानी धीरे-धीरे जमीन में समाहित होकर भूजल रिचार्ज करता है।
- समय-समय पर गाद हटाना
- टूट-फूट की मरम्मत करना
- जल निकासी मार्ग साफ रखना
- आसपास वृक्षारोपण करना
हाँ। इससे सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध रहता है, जिससे खेती एवं फसल उत्पादन में सुधार होता है।
हाँ। बिहार सरकार द्वारा संचालित जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं भूजल संवर्धन हेतु चेकडैम निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
- चेकडैम छोटे आकार की संरचना होती है
- बाँध बड़े जलाशय निर्माण हेतु बनाए जाते हैं
- चेकडैम का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण एवं रिचार्ज है
हाँ। इससे हरियाली बढ़ती है, मिट्टी संरक्षण होता है तथा जल स्रोतों का संरक्षण होता है।
- सिंचाई सुविधा में वृद्धि
- पेयजल उपलब्धता बेहतर होना
- कृषि उत्पादन में सुधार
- जल संकट में कमी
- रोजगार एवं ग्रामीण विकास को बढ़ावा
हाँ। लाभुक द्वारा नए तालाब का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है।
हाँ। निजी तालाब में जल-जीवन-हरियाली का लोगो युक्त सूचना पट्ट लगा हुआ है।
हाँ। वर्तमान समय में लाभुक द्वारा तालाब में मत्स्यपालन का कार्य सुगमता से किया जा रहा है।
हाँ। जिस भूमि पर स्थल निरीक्षण किया गया था, उसी पर तालाब का निर्माण किया गया है।
- मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लाभुकों के लिए 70%, अन्य वर्ग के लिए 50% तथा उद्यमी के लिए 40%
- तालाब मात्स्यिकी विशेष सहायता योजना: केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लाभुकों के लिए 70%
- पठारी क्षेत्र तालाब निर्माण आधारित मत्स्यपालन योजना: केवल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लाभुकों के लिए 80%
हाँ। लाभुक द्वारा निजी भूमि पर पोखर-सह-मखाना का निर्माण कार्य किया गया है और यह सुचारू रूप से चल रहा है।
हाँ। वर्तमान समय में लाभुक द्वारा मनरेगा के तहत खुदवाए गए तालाब में मत्स्यपालन किया जा रहा है और तालाब पूर्ण रूप से क्रियाशील है।
हाँ। लाभुक द्वारा मत्स्य-सह-मखाना पालन किया जा रहा है, जिससे जीविका चलाने में सहयोग मिलता है और लाभुक इस काम में सक्रिय है।
हाँ। लाभुक अपनी भूमि पर नए जल स्रोतों के सृजन के अंतर्गत जल संचय कर रहे हैं, जिससे सिंचाई हेतु पानी आसानी से उपलब्ध होता है।
हाँ। लाभुक फार्म पॉन्ड के माध्यम से जल का उपयोग कृषि कार्य हेतु कर रहे हैं।
हाँ। इस पद्धति से किसान कृषि प्रक्षेत्र में सिंचाई हेतु जल संग्रह कर आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग कर रहे हैं।
भवन की छत पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइपों की सहायता से टंकी में एकत्र कर भूजल रिचार्ज किया जाता है।
इसका मुख्य उद्देश्य वर्षा के पानी को व्यर्थ बहने से रोकना और भूजल स्तर को बढ़ाना है।
- छत
- पाइप लाइन
- फिल्टर इकाई
- रिचार्ज पिट
निर्माण लागत घर के आकार पर निर्भर करती है। छोटे घरों में लगभग Rs. 20,000 से Rs. 40,000 और बड़े घरों में Rs. 40,000 से Rs. 70,000 तक खर्च आता है।
निर्माण के बाद छत, नालियों, पाइपों और फिल्टर की नियमित सफाई की जानी चाहिए। रिसाव और भूजल रिचार्ज संरचना की भी समय-समय पर जाँच करनी चाहिए।
शहरी क्षेत्र में छत-वर्षा जल संचयन संरचना का निर्माण कराने पर संपत्ति कर में 5% की छूट मिलती है।
पौधारोपण कार्य मुख्यतः निम्न माध्यमों से कराया जाता है:
- वन विभाग, बिहार
- मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीण विकास विभाग, बिहार
- सड़क किनारे
- नहर एवं आहर-पइन के किनारे
- सरकारी भूमि
- विद्यालय परिसर
- पंचायत भूमि
- नदी एवं तालाब किनारे
पौधे मुख्यतः निम्न स्रोतों से उपलब्ध कराए जाते हैं:
- वन विभाग की नर्सरी
- सरकारी पौधशालाएँ
- दीदी की पौधशाला
स्थानीय जलवायु एवं पर्यावरण के अनुसार निम्न लगाए जाते हैं:
- फलदार पौधे
- छायादार वृक्ष
- औषधीय पौधे
- पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी प्रजातियाँ
हाँ। आवश्यकता अनुसार पुनः पौधारोपण अथवा गैप फिलिंग किया जाता है।
कुछ योजनाओं के अंतर्गत पात्रता एवं लागू नियमों के अनुसार निजी भूमि पर भी पौधारोपण किया जा सकता है।
सरकारी पौधों को नुकसान पहुँचाने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
देखभाल में निम्न सहयोग करते हैं:
- संबंधित विभाग
- ग्राम पंचायत
- स्थानीय समुदाय
- स्वयं सहायता समूह
जैविक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ती है, स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षित रहते हैं, उत्पादन लागत में कमी आती है तथा उत्पादों का अधिक दाम मिल सकता है।
अनुदान संबंधी जानकारी के लिए प्रखंड कृषि पदाधिकारी अथवा जिला कृषि पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। अनुमानतः Rs. 50,000 प्रति हेक्टेयर का अनुदान उपलब्ध है।
जैविक कृषि का सत्यापन BSSOCA, बिहार राज्य बीज और जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी, मीठापुर, पटना द्वारा किया जाता है।
सूक्ष्म सिंचाई के दो प्रकार होते हैं:
- टपक सिंचाई
- फव्वारा सिंचाई
सूक्ष्म सिंचाई के लिए किसान की स्वयं की जमीन होनी चाहिए अथवा कम से कम 7 वर्षों के लिए पट्टे पर जमीन का करारनामा होना आवश्यक है।
सूक्ष्म सिंचाई में 80% से 90% तक अनुदान उपलब्ध है।
टपक सिंचाई के लिए 0.5 एकड़ तथा फव्वारा सिंचाई के लिए 1 एकड़ भूमि पर किसान की स्वयं की जमीन अथवा कम से कम 7 वर्षों के लिए पट्टे पर जमीन का करारनामा होना चाहिए।
मौसम अनुकूल कृषि के अंतर्गत सूखा एवं बाढ़ सहनशील बीज, फसल विविधीकरण, फसल चक्र, कम जुताई, खेत में फसल अवशेष छोड़ना, मल्चिंग आदि तकनीक आती हैं।
मौसम अनुकूल कृषि तकनीक अपनाने के लिए अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।
हाँ। मौसम अनुकूल कृषि के लिए सहायता कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से सामग्री के रूप में दी जाती है।
इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और ऊर्जा बचत के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
सरकारी भवनों पर सोलर पैनल का इंस्टॉलेशन Bihar Renewable Energy Development Agency (BREDA) द्वारा किया जाता है।
Bihar Renewable Energy Development Agency (BREDA) बिहार सरकार की एक एजेंसी है, जो राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा, जैसे सौर ऊर्जा, को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है।
नहीं। अवयव 10 के अंतर्गत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए मुख्य रूप से सरकारी भवनों पर Bihar Renewable Energy Development Agency के माध्यम से सोलर पैनल स्थापित किए जाते हैं। निजी घरों पर सोलर पैनल लगाने का प्रावधान इस अवयव के अंतर्गत नहीं है।
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